7 एवं 11 सितंबर: हरियाणा के सफ़ाई कर्मचारियों के शानदार आंदोलन से एकजुटता और भागीदारी; हरियाणा के बहादुर सफ़ाई कर्मचारियों का पूरे 37 दिन चला बहुत ही शानदार आन्दोलन देश के मज़दूरों के सामने एक मिसाल बन गया है. उनकी एकजुटता और हौसले के सामने हरियाणा सरकार को झुकना पड़ा और उनकी अधिकतर मांगें माननी पड़ीं. महिला साथियों ने ख़ासतौर पर बहुत ही दिलेरी से पुलिस दमन का मुक़ाबला किया.

‘क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा’ सफ़ाई कर्मियों के आंदोलन में शुरू से ही रहा और कार्यकर्ता उनके धरने में लगातार शामिल हुए साथ ही आंदोलन की नेतृत्वकारी टीम से अपील की कि सभी क्रांतिकारी मज़दूर संगठनों, ट्रेड यूनियनों को साथ लेते हुए, ज़िला स्तर पर संघर्ष के औज़ार, ‘संयुक्त ट्रेड यूनियन कौंसिल’ का विस्तार कर उसे क्रियाशील और उर्ज़ाशील बनाया जाए. छोटे-बड़े सभी मज़दूर संगठनों तथा सारे मेहनतक़श अवाम को उसमें शामिल किया जाए जिससे भाजपा-संघ का असली चरित्र उजागर होने के कारण ज्यादा से ज्यादा समाज जो उनके विरुद्ध नफ़रत से भरता जा रहा है, वह भी मज़दूरों के कैम्प में आ सके.
13 सितंबर: रोहतक में 'किसानी प्रतिष्ठा मंच' के साथ हुई वार्ता और प्राप्त सम्मान बहुत ख़ास है. भविष्य में हरियाणा राज्य स्तर पर साझा राजनीतिक कार्यों की संभावना पर चर्चा हुई. मजदूरों और मेहनतकश किसानों की क्रांतिकारी वर्गीय एकजुटता मुक्ति संघर्ष की कामयाबी की ज़रूरी शर्त है.

15 – 16 सितंबर को इलाहबाद में आयोजित दो दिवसीय सघन चर्चा सत्र के बाद
7 सदस्यीय ‘उत्तर प्रदेश राज्य सांगठनिक कमेटी’ का गठन
उत्तर प्रदेश के प्रमुख कार्यकर्ताओं का दो दिवसीय ‘गहन राजनीतिक शिविर’ दिनांक 15 – 16 सितंबर को इलाहाबाद में संपन्न हुआ, जिसमें कॉमरेड सत्यवीर सिंह तथा कॉमरेड मुकेश असीम ने भी भाग लिया. उत्तर प्रदेश की विभिन्न ज़िलों से 6 कार्यकर्ताओं ने शिविर में बहुत सक्रियता और उत्साह से भाग लिया. एक साथी अस्वस्थ होने की वज़ह से चर्चा सत्र में भाग नहीं ले पाए. सत्र के अंत में 7 सदस्यीय ‘उत्तर प्रदेश राज्य सांगठनिक कमेटी’ गठित की गई.
साथियों ने अमर शहीद क्रांतिवीर चंद्रशेखर आज़ाद के शहीद स्थल जाकर अपना क्रांतिकारी अभिनंदन प्रस्तुत किया.
27 तथा 28 सितंबर को शहीद-ए-आज़म भगतसिंह का 119 वाँ जन्म दिन और ‘क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा’ का चौथा स्थापना दिवस दोनों शानदार ढंग से मनाए गए:
फ़रीदाबाद: 27 सितंबर को हलकी बारिश के बीच ग्रेटर फ़रीदाबाद की मास्टर रोड पर बादशाहपुर मोड़ से गांव तक ज़ोरदार नारों के साथ में मोर्चा निकालकर अम्बेडकर भवन पर साथी रिशिपाल जी की अध्यक्षता में सभा हुई जिसमें संगठन के कार्यकर्ताओं के अलावा गांव निवासी साथियों अजीमुद्दीन, आसिफ़ भाई और रोहताश जी अपने विचार रखे और भगतसिंह के विचारों को समाज के कोने-कोने में पहुँचाने तथा उनके सपनों को साकार करने, आर्थिक आज़ादी वाली समाजवादी क्रांति को कामयाब करने का संकल्प लिया गया. 28 सितंबर को लखानी चौक से भगतसिंह चौक, आज़ाद नगर, सेक्टर 24 तक मार्च, परचा वितरण तथा मज़दूर संपर्क अभियान चलाया गया. गगनभेदी नारों के बीच सभी साथियों ने भगतसिंह की मूर्ति पर माल्यार्पण का कार्यक्रम हुआ.
बलिया ज़िला इकाई, उत्तर प्रदेश
दिनांक 28 सितंबर 2026 को शहीद ए आज़म भगत सिंह का जन्म दिवस प्राइमरी स्कूल चिलकहर बलिया उत्तर प्रदेश में कां राजेंद्र कुमार की अध्यक्षता में क्रांतिकारी मजदूर मोर्चा के बैनर तले मनाया गया कार्यक्रम की शुरुआत में साथी अमितेश गिरी ने क्रांतिकारी गीत प्रस्तुत किया इसके बाद साथियों ने शहीद ए आजम भगत सिंह की क्रांतिकारी संघर्षों को याद करते हुए उनके सपनों का भारत बनाने का संकल्प लिया कार्यक्रम में रेलवे ठेका मजदूर यूनियन एवं नरेगा मजदुरो के सांगठनिक गठन की प्रक्रिया अक्टूबर में की जाएगी कार्यक्रम के मुख्य वक्ता रामनरेश का अभिजीत चौहान का अमितेश गिरी सुगन यादव कामरेड जवाहर पाल जी कां सर्व देव भगत आदि व्यक्ताओं ने अपना विचार रखा अंत में गगन भेदी नारों से कार्यक्रम का समापन हुआ.

इलाहाबाद से क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा उत्तर प्रदेश राज्य सांगठनिक कमेटी की रिपोर्ट
28 सितंबर, दिन सोमवार को नागरिक समाज, इलाहाबाद के तरफ से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी तथा बर्खास्तगी को लेकर पत्थर गिरजाघर स्थित सिविल लाइंस में एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस विरोध प्रदर्शन में सभी वक्ताओं ने एक स्वर में ज्ञानेश कुमार के गिरफ्तारी के पक्ष में आवाज उठाई तथा विस्तारपूर्वक भारत सरकार के संरक्षण में ज्ञानेश कुमार द्वारा एस आई आर के नाम पर 30 राज्यों में 13 करोड़ वोट काटकर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में सरकार बनाने में जो भूमिका अदा की है, उसकी तीव्र निंदा की गई।
सभी प्रमुख वक्ताओं ने इसे लोकतंत्र पर कुठाराघात बताया तथा दो अन्य चुनाव आयुक्त के द्वारा ज्ञानेश कुमार को दी गई 14 आपत्तियां को खारिज किए जाने की भी चर्चा की गई। सभी सम्मानित साथियों का मानना था कि एकजुट होकर सड़क पर उतरना ही एकमात्र विकल्प है। जिस प्रकार युवाओं के द्वारा जंतर-मंतर के आंदोलन ने पूरे देश भर में एक गर्माहट पैदा की तथा तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा, ठीक उसी प्रकार पुनः ऐसे ही आंदोलन की आवश्यकता है, ताकि लोकतंत्र रूपी खेल के मैदान को बचाया जा सके। वक्ताओं के द्वारा इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार रितिका चोपड़ा और दामिनी नाथ की इस बात के लिए प्रशंसा की गई, जिन्होंने इस घांधली का पर्दाफ़ाश किया।
यह भी कहा गया कि भारत में आदर्श लोकतंत्र की कमी इस सरकार से पहले भी रही है, थोड़ी बहुत धांधली की शिकायत पहले भी आती रही है, लेकिन इस तरह के मामले को पहले कोर्ट संज्ञान में लेता था। लेकिन आज सभी प्रमुख संवैधानिक संस्थाओं को अपनी पार्टी की चौथी इकाई बनाकर पिछले दरवाजे से जिस प्रकार यह सरकार सत्ता में आकर शासन चला रही है, उससे लगातार जन विरोधी नीतियों को लागू करने के साथ केवल कारपोरेटी हित को बढ़ावा मिल रहा है।

आज के विरोध प्रदर्शन में विनोद तिवारी, गायत्री गांगुली, अविनाश मिश्रा, आनंद मालवीय, डॉ पद्मा सिंह, नसीम अंसारी, सुरेंद्र राही, सीमा आजाद, सत्येंद्र सिंह, राजेश सचान, के के पांडे, राजवेंद्र सिंह, मोहम्मद शईद सिद्दीकी, असरार अहमद नियाजी, विश्व विजय जी, मोहम्मद हनफी, मनीष कुमार, कामरेड अविनाश, कामरेड भानु, विकास स्वरूप, आयुष द्विवेदी, सोनी आजाद, दिनेश यादव, रितेश विद्यार्थी, प्रशांत, चन्द्रप्रकाश, प्रियांशु, सुहानी, आरती, पूजा, अवनी, ज्योति, जय, हर्ष, आकाश, प्रेमचंद, संजय, अमन, सूरज, हरिओम, विकास, सुरेश निषाद, दीपक, घनश्याम मौर्य, पप्पू, दीपचंद निषाद सहित सैकड़ो की संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
सभा का संचालन नागरिक समाज के सहसंयोजक मनीष सिन्हा तथा अध्यक्षता ऋषेश्वर उपाध्याय ने किया।
झुंझुनू ज़िला इकाई, राजस्थान
दिनांक 28/9/2026 शहीद आजम भगतसिंह की 119 वीं जयंती शहीद भगतसिंह विचार मंच एवं क्रान्तिकारी मजदूर मोर्चा की ओर से भगतसिंह पार्क इन्दिरा नगर झुंझुनूं में श्री मालीराम जी इंजीनियर की अध्यक्षता में मनाई गई। सर्वप्रथम शहीद भगतसिंह, राजगुरु एवं सुखदेव को माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की गई। पूंजीवाद साम्राज्यवाद मुर्दाबाद, इंकलाब जिंदाबाद, शहीद भगतसिंह अमर रहे के नारे लगाए गए। इसके बाद भगतसिंह का प्रिय गीत "मेरा रंग दे बसंती चोला" से शुरूआत करते हुए, "पूंजीवाद साम्राज्यवाद के दौर में भगतसिंह के विचारों की प्रासंगिकता एवं सर्वहारा वर्ग की भूमिका " विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में भाग लेते हुए वक्ताओं ने कहा कि हमें आज इस विषय पर विचार करना चाहिए कि भगतसिंह और उनके क्रान्तिकारी साथियों ने जिस मकसद के लिए अपना बलिदान दिया था, वह पूरा हुआ या नहीं? क्या उनके सपनों का भारत बना? क्या भारत की शोषित पीड़ित मेहनतकश जनता को वह आजादी मिली जिसके लिए अपनी जान कुर्बान की थी? आज भी शोषण उत्पीड़न जारी है। आज भी किसानों मजदूरों की मेहनत का फल नहीं मिल रहा है, लूट आज भी जारी है। किसानों को उसकी फ़सल का वाजिब मूल्य नहीं मिल रहा है, चार लेबर कोड बनाकर मजदूरों के अधिकारों को छीना जा रहा है और जीने लायक न्यूनतम मजदूरी मांगने पर उन्हें लाठी गोली, जेल का सामना करना पड़ता है। दलितों वंचितों पर जातिगत उत्पीड़न बढ़ रहा है। इस हालात में हमें भगतसिंह के विचारों को जाने, उनकी रोशनी में पूंजीवादी शोषण और जाति धर्म के सामाजिक भेदभाव की व्यवस्था में जकड़े देश के हालात पर गोर करें और उनके सपनों को पूरा करने तथा पूंजी के शोषण, सामाजिक उत्पीड़न एवं समस्त भेदभाव से मुक्त समाज बनाने के अधूरे काम को पूरा करने का संघर्ष तेज करने का संकल्प लें। विचार संगोष्ठी में शहीद भगतसिंह विचार मंच के संयोजक बजरंग लाल एडवोकेट, क्रान्तिकारी मजदूर मोर्चा के महेश चौमाल, राजेश आलडिया जिला अध्यक्ष भीम आर्मी, पेंशन समाज के चंद्रप्रकाश धूपिया, मुस्लिम न्याय मंच के इमरान बडगूजर, लियाकत अली "भावुक", डॉ जगदीश बरवड़, फूलचंद बुडानिया, विजय गोपाल, बलबीर काला, युनूस अली भाटी, महताब चौधरी, बालाराम मेघवाल, कामरेड कपील देव आर्य एवं राशि ने अपने विचार व्यक्त किए। इसके अलावा लक्ष्मीनारायण, धर्मपाल डारा, ओमप्रकाश तेतरवाल, चंद्रप्रकाश सोहू, दयानंद जानू, रामनारायण झाझडिया, पितराम कालेर, रमेश कटेवा, त्रिलोक सिंह, रामप्रताप, महेंद्र चारावास, भागीरथ कपूरिया, कुरड़ाराम ऐचरा, रामनिवास बेनिवाल, धर्मपाल खेदड़, जगमालसिंह, लीलाधर पारीडिया, रायसिंह, हरिराम शिथल, सज्जन कुमार, के अलावा कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। संचालन बजरंग लाल एडवोकेट ने किया। विजयपाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
जयपुर ज़िला इकाई, राजस्थान
साथी प्यारेलाल जी की अध्यक्षता में जाटव समाज के साथियों के साथ शहीद-ए-आज़म भगतसिंह के जन्म दिन 28 सितंबर को एक सभा हुई जिसमें भगतसिंह के विचारों को पढ़ने-पढ़ाने के अभियान चलाए जाने तथा आधी-अधूरी आज़ादी की जगह भगतसिंह के सपनों वाली असली आज़ादी के अधूरे पड़े कार्य को पूरा करने पर ज़ोर दिया गया.
