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बहादुरों! एक नए युद्ध की तैयारी का वक़्त आ गया है. पूरी ज़िद के साथ, वीरतापूर्वक लेकिन शांत चित्त से, किसी भी भड़कावे में आए बगैर, तैयारियों में जुट जाओ, अपनी सारी शक्ति समेटकर गोलबंद हो जाओ
‘कर्मचारी राज्य बीमा निगम’ आपकी संस्था है, आपके पैसे से चल रही है, आप इसके मालिक हैं, इसे तबाह होने से बचाना आपकी ज़िम्मेदारी है. इसे बचाने के संघर्ष में हमारा साथ दीजिए
हमारे व्याख्यात्मक मतभेद आज संस्थागत हो गए हैं और उनमें काफी जड़ता आ गई है।
औद्योगिक क्रांति से मालिक को अपार दौलत मिली और मज़दूर को जीवन मुक्ति का अचूक यन्त्र
एक कंपनी के मज़दूर इकट्ठे होकर मालिक को दिन में तारे दिखा सकते हैं. सभी कंपनियों, शहरों के मज़दूर इकट्ठे हो जाएं, तो क्या होगा? ये गंभीर राजनीतिक सवाल है. इसका उत्तर ढूंढने हेतु गंभीर विचार करना होगा
मौजूदा दौर में यही है, पूंजीवादी विकास का असली स्वरूप!!