दिल्ली परिवहन निगम (DTC) द्वारा ठेके पर लिए गए 12,000 से भी अधिक ड्राईवर 15 सितंबर से हड़ताल पर हैं. वे अपने-अपने डिपो के सामने धरने पर बैठे हैं. ‘डी टी सी कर्मचारी एकता यूनियन’ के नेता ललित चौधरी ने शनिवार 19 सितंबर को प्रेस को बताया कि दिल्ली के जनमानस को हो रही असुविधाओं के लिए चिंतित होने का दिखावा करने वाली दिल्ली सरकार ने हम हड़ताली ड्राईवरों को धमकाने, नोकरी से हटाकर पक्के अर्थात नियमित ड्राईवरों को काम पर लगाने और हमें कोरे आश्वासन देने के अलावा कुछ नहीं किया. हड़ताल को 5 दिन हो गए, दिल्ली सरकार द्वारा की जा रही वार्ता में हमें कोई गंभीरता नज़र नहीं आई. हमें मात्र रु 862 दिहाड़ी मिलती है, उसमें से रु 60 पीएफ़ के कट जाते हैं. गाड़ी में हुई किसी भी टूट-फूट के नाम पर, उसकी वज़ह जाने बगैर हमारे वेतन से कटौती कर ली जाती है. ऐसी भयानक मंहगाई में 800/ में परिवार का गुजारा नहीं होता. हमसे 12-12 घंटे काम लिया जाता है. साथ ही घर से कार्य स्थल तक हमें अपना किराया लगाकर आना-जाना होता है. सरकारी घुड़कियों से डर कर यह हड़ताल ख़त्म नहीं होने वाली.
कर्मचारी नेता ने एक और बात कही जो अत्यंत गंभीर है, “कुछ बसों की खिड़कियों के शीशे तोड़े जा रहे हैं जिससे हम पर तोड़-फोड़ करने के आरोप लगाए जा सकें.” मज़दूर आंदोलनों में भाजपा सरकारें आंदोलनकारियों से वार्ता शुरू करने की बजाए उन्हें कुचलने के लिए षडयंत्रकारी तरीक़े अपनाने के लिए कुख्यात हो चुकी हैं. दिल्लीवासी ही नहीं सारे देश को याद है कि पिछले महीने छात्रों-युवाओं को बदनाम करने के लिए पत्थरों से भरा ज़ब्त किया ट्रक कई दिन तक संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में सुरक्षित रखा गया और आंदोलन के ‘संसद कूंच’ वाले दिन कैसे जंतर मंतर पर खड़ा कर दिया गया था!!
“ड्राईवरों की अधिकतर मांगें सिद्धांततः मंज़ूर (स्वीकार नहीं) कर ली गई हैं (ACCEPT नहीं बल्कि APPROVE). बस उनकी वेतन आधारित मांगें बची हैं. उनके लिए भी निजी लाभार्थियों (अर्थात ठेकेदारों) से बातचीत चल रही है. ड्राईवरों को अपनी हड़ताल समाप्त कर काम पर लौट जाना चाहिए.” 18 सितंबर को दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह का यह बयान ड्राईवरों को आश्वस्त करने वाला नहीं बल्कि उन्हें आशंकित करने वाला है. ड्राईवरों को मालूम है कि जो सरकार हड़ताल वापस कराते वक़्त शब्दों की बाजीगरी कर रही है, वह उनके काम पर लौटते ही उन्हें भूल जाने वाली है.
‘क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा’ बहुत गंभीरता से दिल्ली सरकार/ केंद्र सरकार के संज्ञान में लाना चाहता है कि पहले तो लेबर कोड्स के नाम पर असीम क़ुरबनियों से हासिल मज़दूरों के सभी 29 अधिकार छीन लिए गए और अब ‘ठेका मज़दूर’ बताकर, सारा उत्पादन, निर्माण और सेवाएँ उपलब्ध करा रहे मज़दूरों को लेबर कोड्स वाले अधिकार भी उपलब्ध नहीं हैं. मज़दूरों के साथ ऐसा घोर अन्याय तो अंग्रेज़ों ने भी नहीं किया था. दमन बढ़ता जाए और प्रतिकार ना हो, ऐसा नहीं होता. ‘क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा’ हड़ताली ड्राईवर साथियों को आश्वस्त करना चाहता है; उनकी इंसाफ और सम्मान की लड़ाई में हम उनके साथ हैं. आंदोलनकारी ड्राईवरों से अपनी क्रांतिकारी वर्गीय एकजुटता रेखांकित करते हुए, हम दिल्ली सरकार से मांग करते हैं कि उनकी इन बहुत ही जायज़ मांगों को तत्काल स्वीकार कर हड़ताल समाप्त कराए, जन मानस को हो रही गंभीर असुविधा से राहत दिलाए.
1) मूल वेतन रु 40,000 घोषित किया जाए, जिसमें मंहगाई वृद्धि के अनुरूप मंहगाई भत्ता वृद्धि का प्रावधान हो.
2) माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए सामान काम का समान वेतन वाला नियम लागू हो.
3) सभी को न्यूनतम 8.33% बोनस मिले.
4) ‘फाइल चार्ज’ के नाम पर ड्राईवरों से होने वाली रु 1,500 की अन्यायपूर्ण उगाही बंद हो.
5) 8 घंटे का कार्य दिवस लागू हो. उससे ज्यादा कार्य पर डबल रेट से ओवरटाइम का भुगतान सुनिश्चित किया जाए.
6) हर ड्राईवर का रु 50 लाख का दुर्घटना बीमा अनिवार्य रूप से किया जाए.
7) साल में 12 दिन का आकस्मिक अवकाश सभी को उपलब्ध हो.
22 सितंबर 2026