मज़दूर नेताओं पर जिला बदर की कार्रवाई रद्द करो! सभी झूठे मुकदमें वापस लो! क्रांतिकारी मजदूर मोर्चा का बयान

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उत्तराखंड की धामी नीत बीजेपी सरकार ने मजदूर कार्यकर्ताओं, इंक़लाबी मज़दूर केंद्र के पंकज कुमार व जय प्रकाश तथा पीपीआईडी के ललित कुमार, को खूंखार अपराधी घोषित कर हरिद्वार से जिला बदर करने का घिनौना कृत्य अंजाम दिया है। उधर सरकार के संरक्षण में खनन व शराब माफिया, दुर्दांत हत्यारे, बलात्कारी व खुलेआम हथियार लहराने वाले अपराधी उत्तराखंड की वादियों में खुले घूम रहे हैं और अंकिता भंडारी के घृणित हत्याकांड में नाम जाहिर होने के बावजूद भी ‘वीआईपी’ को खुलेआम बचाया जा रहा है।

हरिद्वार जिला प्रशासन द्वारा मज़दूर नेताओं को जिला बदर करने की कुत्सित व दमनकारी कार्रवाई की क्रांतिकारी मजदूर मोर्चा सख्त विरोध करता है। मजदूर अधिकारों के लिए आवाज उठाने वालों के दमन के इस तानाशाहीपूर्ण और फासीवादी क़दम की निंदा करते हुए हम मज़दूर नेताओं पर जिला बदर की कार्रवाई सहित दर्ज किए गए सभी फर्जी मुकदमें वापस लेने की भी मांग करते हैं।

ज्ञात हो कि बीते 23 अक्टूबर को हरिद्वार पुलिस ने अचानक साथी जय प्रकाश को उनके कमरे से उठाया और बिना कोई स्पष्ट जानकारी दिये थाने ले गई, उनका फोन जब्त किया और फिर उनसे जिला बदर के आदेश पर हस्ताक्षर करवा कर जिले की सीमा के बाहर छोड़ दिया। साथी पंकज को भी जिला बदर करने के आदेश दिये जा चुके हैं।

इस साल की शुरुआत से ही अत्यधिक पूंजीवादी शोषण-उत्पीड़न से त्रस्त मजदूर देश के विभिन्न हिस्सों में वेतन वृद्धि, आठ घंटे काम, साप्ताहिक छुट्टी, बोनस, दुगुने ओवरटाइम आदि मांगों को लेकर आंदोलनों में उठ खड़े हो रहे हैं। बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड से लेकर गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक तक श्रमिक आंदोलनों का सिलसिला लगातार जारी है। जुझारू मज़दूर संगठनों ने इन स्वतः स्फूर्त मजदूर आंदोलनों को अपना सक्रिय समर्थन और सहयोग दिया है। हरिद्वार में भी मज़दूर आंदोलनों में इंक़लाबी मज़दूर केंद्र ने अपनी सकारात्मक भूमिका निभाई।

इन आंदोलनों के दबाव में राज्य सरकारों को मज़दूरों के न्यूनतम वेतन में वृद्धि करनी पड़ी है। लेकिन बदले में उन्होंने मज़दूरों और मज़दूर नेताओं का दमन तेज कर दिया है। उन पर झूठे मुकदमे लगा जेलों में बंद किया है। इसी कड़ी में हरिद्वार सिडकुल में मज़दूर संघर्षों में सक्रिय इंक़लाबी मज़दूर केंद्र के पंकज और जय प्रकाश पर गुंडा एक्ट लगा दिया गया। इसके अलावा पीपीआईडी के ललित कुमार पर भी गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई हुई।

यही नहीं सिडकुल पंतनगर स्थित ऐरा (एपेक्स) बिल्डिसिस के मजदूर 2017 से ही कार्य बहाली को लेकर संर्घष कर रहे थे। NCLT से निर्णय के बावजूद जिला प्रशासन मजदूरों की कार्यबहाली कराने के स्थान पर 16 सितंबर 2026 से फैक्ट्री गेट पर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन कर रहे 40 मजदूरों पर शांतिभंग का मुकदमा दर्ज कर नोटिस भेज दिये। इससे पूर्व इंट्रार्क मज़दूर संगठन के अध्यक्ष व श्रमिक संयुक्त मोर्चा ऊधम सिंह नगर के कार्यकारी अध्यक्ष दलजीत सिंह पर भी प्रशासन ने गुंडा एक्ट में कार्यवाही शुरू की है।

यह बेहद घिनौना है कि उत्तराखंड की धामी सरकार ने मज़दूर नेता को खूंखार अपराधी घोषित कर जिला बदर कर दिया। गौर करने की बात है कि जब सामंती निरंकुश शासक होते थे और जनता अधिकार विहीन होती थी तब शासक विरोधियों को देश निकाला या निर्वासन किया करते थे। भारत को ग़ुलाम बनाने वाले ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन में भी विरोधियों को काला पानी, बर्मा में निष्कासन तथा जिला बदर जैसी कार्रवाइयां की जातीं थीं। किंतु आज देश में संविधान का शासन और दुनिया का सबसे बड़ा जनतंत्र बताया जाता है। फिर भी शोषित मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्षरत नेताओं को गुंडा बताकर मौजूदा ‘राष्ट्रवादी’ सरकार द्वारा उन पर वही औपनिवेशिक गुलामी माफिक जिला बदर की कार्रवाई बताती है कि आज भी यह ‘जनतंत्र’ केवल पूंजीपतियों का शासन है, मेहनतकशों के लिए तो इसमें आज भी ग़ुलामी और दमन ही है। मजदूरों-मेहनतकशों को अपने लिए वास्तविक जनतंत्र हासिल करने का संघर्ष आज भी बाकी है।

खुली बेशर्मी का यही हाल पूरे देश में चल रहा है। गुड़गांव-मानेसर, नोएडा आदि में हजारों मज़दूरों व मज़दूर नेताओं की गिरफ़्तारी, रासुका जैसे गंभीर धराएं थोपने से लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों-युवाओं तथा जनवादी हकों के लिए आवाज़ उठाने वालों पर भयावह दमन तक भाजपा सरकारों का फासिस्ट चेहरा लगातार सामने आता रहा है। धर्म, जाति, इलाके, भाषा की दीवारों को तोड़कर दृढ़ अवामी एकता क़ायम करते हुए इसकी हर हाल में एकजुट मुखालफ़त ज़रूरी है।

क्रांतिकारी मजदूर मोर्चा उत्तराखंड सरकार से हरिद्वार में मज़दूर नेताओं के जिला बदर की कार्रवाई को रद्द करने, उन पर दर्ज सभी झूठे मुकदमें वापस लेने और मज़दूरों व मज़दूर नेताओं का दमन बंद करने की मांग करता है। साथ ही हम सभी जनवाद व इंसाफ पसंद संगठनों-नागरिकों से इन कृत्यों के एकजुट विरोध के लिए आगे आने की अपील करते हैं।


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