जन कवि साथी कैलाश मनहर की कविता

Mashaal

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तुम्हारे पास बहुत सारी पुलिस है
बेतहाशा बढ़ती महँगाई के विरुद्ध बोलने वाले
लोगों के दरवाज़ो् पर लाठियाँ ठोंकते हुये उन्हें
जबर्दस्ती से गिरेबान पकड़ कर हथकड़ी लगा
हवालात में बंद कर देने के लिये

तुम्हारे पास सेना और सशस्त्र बल हैं
तुम्हारी तानाशाही का प्रतिरोध जताने वाले लोगों को
देशद्रोही बताते हुये गोलियों से भून देने के लिये और
निरपराधों की हत्या कर देने के लिये

तुम्हारे पास जाँच ऐजेन्सियाँ हैं
तुम्हारे भीतर भरी हुई क्रूर घृणास्पद कट्टरता की
सच्चाई को बाहर आकर बताने
वाले अधिकारियों को झूठे आरोपों में फंसा कर
यातनागृहों में डाल देने के लिये

तुम्हारे पास अपने न्यायालय हैं
न्याय चाहने वालों को ही अपराधी बता कर
जुर्माना भरने और सज़ा देने के
लिये तुम्हारे पास न्यायाधीश हैं भयभीत या
उच्च पद प्राप्ति के लिये लोभी

तुम्हारे पास कवियों का झुण्ड है
पुरस्कार और सम्मान प्राप्ति के लिये हर जगह
अँधभक्तों से ताली-थाली बजवा
राष्ट्रवाद के नाम सुनाता हुआ तुम्हारी प्रशंसा में
बड़े बड़े मंचों से चुटकलानुमा कवितायें जबकि
कविता में उनकी कुछ अर्थ नहीं

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