कविता

गिरो

गिरते रहो, गिरते रहो, जब तक कि गिरने की प्रक्रिया निष्क्रिय ना हो जाए, गिरो, गिरो

हूबनाथ पांडे

व्यापार समझौता

गर सब मिलकर साथ लड़े तो, समझो जीत लिया मुकाबला है।

रणवीर सिंह

जन कवि साथी कैलाश मनहर की कविता

तुम्हारे पास सेना और सशस्त्र बल हैं तुम्हारी तानाशाही का प्रतिरोध जताने वाले लोगों को

Mashaal

मैं, राहुल, अपनी टूटी हुई मूर्ति से बोल रहा हूँ - सुधीर ढवळे

विचार की कोई मूर्ति नहीं होती; इसलिए उसे कभी गिराया नहीं जा सकता

Mashaal

जॉर्जी दिमित्रोव

अभियुक्त वह व्यवस्था है जो अपनी संसद को जलाकर जनता को अपराधी घोषित करती है।

एम के आजाद

पीठ पर बस्ता, आँख में सवेरा

मज़दूर, छात्र, किसान मिले—अब राह कोई दूर नहीं

एम के आजाद
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