व्यापार समझौता

रणवीर सिंह

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जब कोरोना दहशत थी,

चुपके से कानून बनाए थे;

अन्नदाता यूं कर भड़के थे,

दिल्ली होली पर जलाए थे।

फिर मंडी मसौदा आया था,

चारों ओर ढोल पिटवाया था;

अन्नदाता फिर से गुरयाया था,

मंसूबा आगे ना बढ़ पाया था।

फेंका अब तीसरा पत्ता है,

नाम अमरीका समझौता है;

शुद्ध अंग्रेजी में बनवाया है,

ढोल फिर से पिटवाया है।

किसान ने भी करवट बदली है,

सोचा संकट वाकई असली है;

दरबारी तारीफ यह नकली है,

सेठजी ने बस भाषा बदली है।

आई ट्रेक्टर राशन की बारी है,

राजधानी कूच की तैयारी है;

विकास तो सिर्फ एक नारा है,

खेती लेने की पुख्ता तैयारी है।

गुस्से से आज मज़दूर उबला है,

और युवा भी बाहर निकला है;

गर सब मिलकर साथ लड़े तो,

समझो जीत लिया मुकाबला है।



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