
कानून और व्यवस्था संयंत्र की भूमिका
तीन उदाहरण
- 2021 का किसान आन्दोलन: कंक्रीट के भारी स्लैब, खाइयां, कीलें, आंसू गैस के गोले, पानी की बौछार और लाठीचार्ज, पानी, बिजली और टॉयलेट सुविधा में अड़ंगे, विदेशी ताकतों से पैसा और देशद्रोह के झूठे आरोप और अनगिनत मुकदमें।
- 2026 के मज़दूर प्रदर्शन: इकट्ठा होने में बाधाएं, भारी लाठीचार्ज, आने-जाने वाले भी लपेटे में, बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां जिनमें नाबालिग, महिलाएं, कार्यकर्ता और वकील भी शामिल और कुछ के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की गंभीर धाराएं।
- 20 जुलाई 2026 का युवा संसद मार्च: नाबालिगों समेत युवाओं पर अंधाधुंध लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले, कील वाले डंडे, पैलेट गन से फायरिंग, बिना नाम पत्रिका वाले और रूमाल से अपना चेहरा छिपाते जवान, सादे कपड़ों वाले लठैत, पुरुष पुलिसवालों द्वारा महिला प्रदर्शनकारियों के साथ धक्का मुक्की और युवाओं के खिलाफ मुकदमे।
कानून और व्यवस्था संयंत्र के उदय और विकास के इतिहास में जाए बिना, हम शायद उनके व्यवहार को नहीं समझ सकते। हम उनकी परवरिश या संस्कृति को दोष दे रहे हैं। हम उनके व्यवहार पर हैरान हैं। क्रमबद्धता पर ध्यान दें – दास प्रहरी – घुड़सवार मार्शल – पुलिस। एक संस्था जो कटखने कुत्तों की मदद से गुलामों को पकड़ने, पीटने और वापस नर्क में धकेलने के लिए बनी, बेगार मज़दूरों पर भाले से वार करने के लिए विकसित हुई, और आगे चलकर अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले किसी भी व्यक्ति को बेरहमी से पीटने के लिए परिणत हुई। हम ऐसी संस्था से उपरोक्त तीन उदाहरणों के अलावा और किस तरह के व्यवहार की उम्मीद कर सकते हैं? जैसे दास प्रहरी, दासप्रथा का और घुड़सवार मार्शल, सामंतवाद का संरक्षण कर पाए वैसे ही पुलिस भी पूंजीवाद का संरक्षण कर पाएगी!■
