ग्लोबल जस्टिस रिपोर्ट जैसे समानता व न्याय आधारित समाज के समाधान भी धर्मों की तरह एक आधुनिक रासायनिक नुस्खे वाली अफ़ीम हैं जिनका मकसद मजदूरों को शोषण-उत्पीड़न से मुक्ति के संघर्ष से विमुख करना है।
बद से बदतर होती जा रही आर्थिक, राजनैतिक और सामाजिक परिस्थितियों में, दिन रात संविधान को बचाने की रट से ज़्यादा महत्वपूर्ण और आवश्यक है- व्यवस्था परिवर्तन के लिए वर्ग चेतना पर आधारित वर्ग संघर्षों की
हमारे व्याख्यात्मक मतभेद आज संस्थागत हो गए हैं और उनमें काफी जड़ता आ गई है।
मार्क्सवाद किसी जाति विशेष, वर्ग विशेष या किसी देश विशेष की बपौती नहीं है, न हो हो सकता है। मार्क्सवाद तो दुनिया के तमाम दलितों, शोषितों और पीड़ितों की मुक्ति का दर्शन है