बद से बदतर होती जा रही आर्थिक, राजनैतिक और सामाजिक परिस्थितियों में, दिन रात संविधान को बचाने की रट से ज़्यादा महत्वपूर्ण और आवश्यक है- व्यवस्था परिवर्तन के लिए वर्ग चेतना पर आधारित वर्ग संघर्षों की
हमारे व्याख्यात्मक मतभेद आज संस्थागत हो गए हैं और उनमें काफी जड़ता आ गई है।